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Scam Prevention
9 मिनट

डिजिटल अरेस्ट स्कैम: फेक पुलिस/CBI कॉल से कैसे बचें — PM मोदी की चेतावनी

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? फेक पुलिस, CBI, नारकोटिक्स कॉल से कैसे बचें। PM मोदी ने भी मन की बात में किया सावधान। पूरी गाइड।

LOCK.PUB
2026-03-16

डिजिटल अरेस्ट स्कैम: फेक पुलिस/CBI कॉल से कैसे बचें

"आपके आधार नंबर से 22 बैंक अकाउंट खोले गए हैं। आपके खिलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हो रहा है। अभी फ़ोन पर रहिए, वरना गिरफ्तारी हो जाएगी।"

यह है "डिजिटल अरेस्ट" — भारत का सबसे खतरनाक और तेज़ी से बढ़ता हुआ साइबर स्कैम। PM नरेंद्र मोदी ने "मन की बात" में खुद इस स्कैम के बारे में देश को चेतावनी दी है। 2025 में इस स्कैम से भारतीयों को ₹2,500 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है?

चरण 1: फ़ोन कॉल

आपको एक कॉल आती है — कभी ऑटोमेटेड IVR, कभी सीधे "अधिकारी" से। कहा जाता है कि आप CBI, ED, नारकोटिक्स ब्यूरो, या कस्टम्स की जाँच में फंसे हैं।

चरण 2: डराना-धमकाना

  • "आपका आधार मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है"
  • "आपके नाम पर ड्रग्स का पार्सल पकड़ा गया है"
  • "आपके बैंक अकाउंट से आतंकी फंडिंग हो रही है"
  • "अगर फ़ोन काटा तो तुरंत गिरफ्तारी होगी"

चरण 3: वीडियो कॉल पर "पेशी"

स्कैमर Skype/WhatsApp वीडियो कॉल पर बुलाते हैं। बैकग्राउंड में फेक पुलिस स्टेशन, वर्दी, और "अधिकारी" दिखते हैं। कभी-कभी फेक "अदालत" भी दिखाई जाती है।

चरण 4: पैसे भेजवाना

"जाँच के लिए" आपसे पैसे एक "सरकारी अकाउंट" में ट्रांसफर करवाए जाते हैं। कुछ मामलों में लोगों ने करोड़ों रुपये भेजे हैं।

चरण 5: फ़ोन पर बंधक

पीड़ित को कहा जाता है कि फ़ोन मत काटो, किसी से बात मत करो, कहीं मत जाओ। लोग 24-48 घंटे तक "डिजिटल बंधक" रहते हैं।

असली बनाम नकली: कैसे पहचानें?

बात असली पुलिस/CBI डिजिटल अरेस्ट स्कैमर
संपर्क लिखित नोटिस/समन फ़ोन कॉल/WhatsApp
गिरफ्तारी वारंट के साथ, व्यक्तिगत "फ़ोन पर रहो"
पैसे कभी नहीं माँगते "सरकारी अकाउंट" में ट्रांसफर
जल्दबाज़ी कानूनी प्रक्रिया "अभी करो वरना जेल"
वीडियो कॉल कभी नहीं Skype/WhatsApp पर

PM मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने "मन की बात" में स्पष्ट कहा:

"डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ कानून में नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी फ़ोन पर धमकी नहीं देती, वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती। ऐसी कॉल आए तो डरिए मत — रुकिए, सोचिए, एक्शन लीजिए।"

डिजिटल अरेस्ट से बचने के 8 नियम

  1. "डिजिटल अरेस्ट" कानून में नहीं है — यह 100% स्कैम है
  2. कोई भी सरकारी एजेंसी फ़ोन पर गिरफ्तारी नहीं करती
  3. पुलिस/CBI/ED कभी पैसे नहीं माँगती
  4. WhatsApp/Skype पर कोई सरकारी जाँच नहीं होती
  5. फ़ोन काटने से गिरफ्तारी नहीं होती — डरने की ज़रूरत नहीं
  6. किसी भी "सरकारी अकाउंट" में पैसे न भेजें
  7. परिवार या दोस्त से तुरंत बात करें
  8. 1930 (Cyber Crime Helpline) पर तुरंत कॉल करें

किन लोगों को ज़्यादा निशाना बनाया जाता है?

वर्ग क्यों निशाना
सीनियर सिटीज़न टेक्नोलॉजी से कम परिचित, डर ज़्यादा
प्रोफेशनल्स इज़्ज़त बचाने का दबाव
NRI भारत में कानूनी प्रक्रिया की जानकारी कम
महिलाएँ "पुलिस" से डर ज़्यादा
छात्र "करियर बर्बाद" की धमकी

अगर कॉल आ जाए तो?

  1. फ़ोन काट दें — कुछ नहीं होगा
  2. नंबर ब्लॉक करें
  3. 1930 पर रिपोर्ट करें
  4. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
  5. परिवार को बताएँ
  6. सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि और लोग सावधान हों

डिजिटल सुरक्षा के लिए टिप्स

अपनी संवेदनशील जानकारी — आधार, बैंक डिटेल्स, पासवर्ड — कभी भी WhatsApp पर शेयर न करें। अगर किसी विश्वसनीय व्यक्ति को भेजना है, तो LOCK.PUB पर एन्क्रिप्टेड लिंक बनाएँ। पासवर्ड से सुरक्षित, ऑटो-एक्सपायर, कोई निशान नहीं।

यह जानकारी फैलाएँ

डिजिटल अरेस्ट स्कैम इसलिए कामयाब होता है क्योंकि लोगों को पता नहीं होता कि यह फ्रॉड है। अपने माता-पिता, दादा-दादी, और परिवार के सभी सदस्यों को बताएँ:

  • "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई चीज़ नहीं है
  • पुलिस फ़ोन पर पैसे नहीं माँगती
  • डरो मत, फ़ोन काट दो, 1930 पर कॉल करो

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